कृषि विभाग द्वारा क्रियान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत राज्य के किसानों को कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में विकास के लिए सुविधाएं एवं सहायता प्रदान की जा रही हैं। कृषि विभाग द्वारा कृषकों को देय सुविधाओं का वितरण निम्नानुसार है:-

कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम (आत्मा):-

  • कृषक प्रशिक्षण एवं भ्रमण-कृषकों के लिए अन्तः जिला, अन्तः राज्यीय तथा अन्तर्राज्यीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
  • प्रदर्शन -इस गतिविधि में 0.4 हैक्टर क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए आदानों की लागत का 50 प्रतिषत अथवा अधिकतम रूपये 2,000 प्रति प्रदर्शन की सहायता दी जाती है।
  • फार्म स्कूल-विभिन्न कृषि गतिविधियों पर अधिकतम रुपये 29414/- प्रति फार्म स्कूल व्यय किए जाने का प्रावधान है।
  • कृषक पुरस्कार-पंचायत समिति, जिला एवं राज्य स्तर पर सम्मानित किये जाने हेतु क्रमषः 10,000/-, 25,000/- एवं 50,000/- रूपये प्रति कृषक पुरस्कार राषि दिये जाने का प्रावधान है।
  • कृषक अभिरूचि समूहों का गठन एवं क्षमता निर्माण-आवश्यकता आधारित समान अभिरूचि तथा समान समस्याओं के आधार पर 15 से 20 कृषकों का समूह गठित किये जाने पर समूहों को क्रियाशील करने के लिएरूपये 5000/- तथा सीड मनी के रूप में रूपये 10,000/- प्रति समूह देने का प्रावधान है।
  • कृषि सूचना का प्रचार-प्रसार-नवीनतम तकनीक की जानकारी कृषकों तक पहुँचाने तथा कृषकों द्वारा किये जा रहे उत्कृश्ट कार्यों को प्रदर्षित करने के लिए जिला स्तर पर प्रदर्शनी/किसान मेले का आयोजन किया जाता है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन:-

भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित इस योजना का लक्ष्य सतत आधार पर गेहूँ और दलहनी फसलों की उत्पादकता व उत्पादन को बढ़ाना है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (गेहूँ) के अन्तर्गत किसानों को देय सुविधाएं:-

  • गेहूँ फसल प्रदर्शन: गेहूँ के 0.4 हैक्टर क्षेत्र में प्रदर्शन हेतु कृषकों को बीज, उर्वरक, पौद्य संरक्षण रसायनों व अन्य विविध व्यय पर राषि रूपये 2000/- की सहायता देय है। गेहूँ के 50 हैक्टर क्षेत्र पर 0.4 हैक्टर के एक प्रदर्शन का आयोजन किया जाता है।
  • मिनिकिट बीज वितरण: नवीनतम विकसित/पूर्व विकसति गेहूँ की उन्नत किस्मों को लोकप्रिय बनाने तथा प्रचार-प्रसार के लिए 10 कि.ग्रात्र के मिनिकिट का किसानों को निःशुल्क वितरण।
  • प्रमाणित बीज वितरण: गेहूँ की बीज प्रतिस्थापन दर (एस.आर.आर.) बढ़ाने के लिए कृषकों को प्रमाणित बीज की कीमत का 50 प्रतिषत अथवा रूपये 500/- प्रति क्विंटल जो भी कम हो, की अनुदान सहायता देय है।
  • सूक्ष्म तत्वों के उपयोग को बढ़ाना: कृषकों को एक हैक्टर क्षेत्र में सूक्ष्म तत्व प्रदर्शन आयोजन करने पर सूक्ष्म त्वों की कीमत का 50 प्रतिषत अथवा 500/- रूपये जो भी कम हो, अनुदान देय है।
  • फार्मर्स फील्ड स्कूल (एफ.एफ.एस.) प्रशिक्षण : प्रत्येक 1000 हैक्टर क्षेत्र के लिए एक कृषक क्षेत्रीय स्कूल (फार्मर्स फील्ड स्कूल) होगा। प्रति एफ.एफ.एस. प्रति प्रशिक्षण अधिकतम 17,000/- रूपये का प्रावधान है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (दलहन):-

यह योजना राज्य के सभी जिलों में चलाई जा रही है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (दलहन) के अंतर्गत किसानों को देय सुविधाएं:-

प्रजनक बीज क्रय: दलहनी फसलों के प्रजनक बीज की कीमत पर षत-प्रतिषत अनुदान देय है।

  • दलहनी फसलों के आधारीय तथा प्रभावित बीज उत्पादन पर 1000/- रूपये प्रति क्विंटल का अनुदान देय है जिसमें बीज उत्पादक संस्थाओं द्वारा प्रमाणित बीज उत्पादन पर प्रत्येक क्विंटल के लिए बीज उत्पादकों (किसानों) को प्रोत्साहन के रूप में 750/- रूपये तथा शेष 250/- रूपये प्रति क्विंटल की दर से अनुदान बीज उत्पादक संस्था को हैण्डलिंग/क्लीनिंग/ग्रेडिंग/प्रोसेसिंग/परिवहन/भण्डारण अधिभार आदि के लिए दिया जाता है।
  • प्रमाणित बीज वितरण: दलहनी फसलों की बीज प्रतिस्थापन दर (एस.आर.आर.) बढ़ाने के लिए प्रमाणित बीज की कीमत का 50 प्रतिषत अथवा रूपये 1200/- प्रति क्विंटल जो भी कम हो अनुदान देय है।
  • सूक्ष्म तत्व उपयोग प्रोत्साहन: कृषकों को एक हैक्टर क्षेत्र में सूक्ष्म तत्व प्रदर्शन आयोजन करने पर सूक्ष्म तत्वों की कीमत का 50 प्रतिषत अथवा 500/- रूपये जो भी कम हो, अनुदान देय है।
  • समन्वित नाषीजीव प्रबंधन: पेस्टीसाईड्स/बायोएजेन्ट्स/बायो पेस्टीसाईड्स/फेसोमैन ट्रेप एवं लाइट ट्रेप पर लागत का 50 प्रतिषत अथवा 750/- रूपये प्रति हैक्टर जो भी कम हो, अनुदान देय है।

सिंचाई जल प्रबंधन गतिविधियों के अंतर्गत अनुदान:-

  • डिग्गी निर्माण कार्यक्रम-यह कार्यक्रम राज्य के नहर सिंचित जिलों-श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, कोटा, बारां एवं बूंदी जिलों में क्रियांवित किया जा रहा है। कृषकों द्वारा 400 लाख लीटर एवं इससे अधिक क्षमता की पक्की डिग्गी निर्माण करने पर लागत का 50 प्रतिषत अथवा अधिकतम रूपये 2.00 लाख जो भी कम हो, अनुदान देय है।
  • जल हौज-अनुदान हेतु हौज का आकार 40 x 30 x 06 फीट (7200 घन फीट) अथवा 2 लाख लीटर क्षमता से कम नहीं होना चाहिए। इसी श्रेणी के कृषकों को लागत का 50 प्रतिषत अथवा अधिकतम रू. 50000/- जो भी कम हो अनुदान देय है। यह कार्यक्रम राज्य के जयपुर, अजमेर, दौसा, सीकर, झुन्झुनू, बीकानेर, चूरू, जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, जालौर, पाली व सिरोही जिलों में क्रियांवित किया जा रहा है।
  • फार्म पौण्ड/खेत तलाई-यह कार्यक्रम राज्य के समस्त जिलों में क्रियांवित किया जा रहा है। अनुदान हेतु फार्म पौण्ड की न्यूनतम साईज 20 x 20 x 3 मीटर (12000 घन मीटर) होनी चाहिये। फार्म पौण्ड/खेत तलाई निर्माण पर लघु सीमान्त, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला कृषकों को लागत का 75 प्रतिषत अथवा अकिधतम 50,000/- रूपये जो भी कम हो तथा सामान्य श्रेणी के कृषकों को लागत का 50 प्रतिषत अथवा अधिकतम 50,000/-- रूपये जो भी कम जो, अनुदान देय है।
  • सिंचाई पाईप लाइन कार्यक्रम-एच.डी.पी.ई./पी.वी.सी. सभी साइज की पाईप लाइन स्थापित करने के लिए कृषकों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 15000/- रूपये जो भी कम हो, अनुदान देय है।
    पौध संरक्षण उपाय:-
  • फसलों को कीट-रोग प्रकोप से बचाने के लिए विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं में निम्नानुसार अनुदान देय है-
  • तरल पौध संरक्षण रसायन पर कीमत का 50 प्रतिषत या 200/- रूपये प्रति हैक्टर तथा पाउडर पर प्रति हैक्टर लागता का 50 प्रतिशत या 100/- रूपये में से जो भी कम जो, विशेष परिस्थितियों में आईसोपास योजना में रसायन की लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 500/- रूपये का अनुदान प्रति हैक्टर देय है।
  • कपास में कीट/रोम नियंत्रण हेतु बायो-एजेन्ट्स एन.पी.वी., अजेडिरेक्टीन तथा ट्राईको डर्मा पर कीमत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 900/- रूपये प्रति हैक्टर जो भी कम हो, अनुदान देय है।
  • खरपतवारनाशी रसायनों पर तिलहनी फसलों तथा मक्का में आईसोपाम योजना में रसायन की लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 400/- रूपये प्रति हैक्टर जो भी कम हो, अनुदान देय है।
  • कर्य योजना में खाद्यान्न फसलों (मक्का के अतिरिक्त) में पाउडर खरपतवारनाशी पर 100/- रूपये प्रति हैक्टर तथा तरल पर प्रति हैक्टर 200/- रूपये या रसायन की लागत का 50 प्रतिशत जो भी कम हो, अनुदान देय है। खण्ड की सिफारिश में शामिल खरपतवारनाशी पर रसायन की लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 400/- रूपये प्रति हैक्टर जो भी कम हो निदेशालय की स्वीकृति उपरान्त अनुदान देय होगा।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन अन्तर्गत (लोकल इनिशियेटिव) में गेहूँ फसल में बीजोपचार, खरपतवार/दीमक नियंत्रण हेतु कीमत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 1000/- रूपये प्रति हैक्टर जो भी कम हो, अनुदान देय है।
  • आरसोपास, कार्य योजना एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (दलहन/गेहूँ) अन्तर्गत हस्तचलित एवं पावर चलित पौध संरक्षण उपकरणों के लिए भी लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम निम्नानुसार जो भी कम हो उस पर अनुदान देय है।

हस्त चलित नेपसेक स्प्रेयर:

  • प्लास्टिक पम्प इनसाइड पर 500/- रूपये।
  • प्लास्टिक पम्प आउटसाईड पर 650/- रूपये।
  • ब्रास पर 800/- रूपये (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन अन्तर्गत 1500/- रूपये)।

पैर चलित स्प्रयेर:

  • पैर चलित स्प्रेयर पर 800/- रूपये।
  • रोकर स्प्रेयर पर 800/- रूपये।

हेण्ड रोटरी डस्टर:

  • बेली माउन्टेड पर 700/- रूपये।
  • सोल्डर माउन्टेड पर 800/- रूपये का अनुदान देय है।
  • सीड ड्रेसर (बीज उपचार हेतु) पर 800/- रूपये का अनुदान देय है।

पवर चलित:

  • पावर स्प्रेयर कम डस्टर पर 2000/- रूपये।
  • ट्रेक्टर माउन्टेड पर कार्य योजनान्तर्गत 4000/- रूपये एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन अन्तर्गत 5000/- रूपये प्रति उपकरण अनुदान देय है।

क्षारीय भूमि सुधार, तिलहनी, दलहनी एवं गेहूँ की फसलों में जिप्सम उपयोग:-

छलहनी, तिलहनी व गेहूँ फसलों में, जिप्सम का उपयोग पोशक तत्व के रूप में 250 किलोग्राम प्रति हैक्टर की दर से किया जाता है।

राज्य में भूमि सुधार के लिये तथा तिलहनी, दलहनी व गेहूँ की फसलों के लिए पोषक तत्व के रूप में समान दर पर जिप्सम संपूर्ण राज्य में किसानों को 700/- रूपये प्रति मै.टन के अधिकतम खुदरा मूल्य पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

किसानों को मिट्टी व पानी के जाँच की सुविधा:-प्रयोगशालाओं द्वारा मिट्टी के नमूनों में मुख्य पोषक एवं सूक्ष्म तत्वों की जांच हेतु 5 रू. प्रति नमूना तथा क्षारीय मिट्टी में जिप्सम की आवष्यक मात्रा की जांच हेतु 5/- रूपये प्रति नमूना जांच षुल्क लिया जा रहा है। पानी की जांच हेतु 5/- रूपये प्रति नमूना जांच शुल्क लिया जाता है।

जैविक खेती पर अनुदान:-

  • जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिये किसानों को विभिन्न फसलों के लिये प्रति हैक्टर अधिकतम राषि रूपये 8000/- प्रोत्साहन राशि के रूप में देय है। इस राशि में से 2000/- रूपये खरीफ फसल, 3000/- रूपये रबी फसल तथा शेष राशि 3000/- रूपये पंजीकरण, प्रमाणीकरण आदि हेतु देय है। यह कार्यक्रम चूरू, जयपुर, अलवर, अजमेर, पाली, टोंक, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, बीकानेर, सीकर एवं झुन्झुनू जिलों में लिया गया है।
  • जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 0.4 हैक्टर क्षेत्रफल में फार्मर्स फील्ड स्कूल आधारित प्रदर्शन आयोजन हेतु कृषकों को बीज, जैविक आदान यथा वर्मीकम्पोस्ट/ जैव उर्वरक/जैवनाषी/जैव कारक-ट्राइकोडर्मा, ट्राइकोग्रामा, एन.पी.वी., नीम आधारित कीटनाशक व अन्य जैव आधारित उत्पादों, रोंक-फास्फेट, फेरोमोन ट्रेप, लाईट ट्रेप आदि की कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम राशि रूपये 2000/- प्रति प्रदर्शन, जो भी कम हो, अनुदान स्वरूप् देय होगी। प्रत्येक 5 प्रदर्शन पर एक फारमर्स फील्ड स्कूल आयोजित किया जाता है, जिसमें राशि रूपये 4000/- व्यय का प्रावधान है। यह कार्यक्रम जयपुर, दौसा, अलवर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भरतपुर, उदयपुर, बांसवाड़ा एवं डूंगरपुर जिलों में लिया गया है।

किसानों की ज्ञान वृद्धि के लिए प्रशिक्षण व भ्रमण कार्यक्रम:-

खेती-बाड़ी की नवीनतम तकलीफ के व्यवहारिक एवं समुचित ज्ञान के लिए विभाग द्वारा कई प्रकार के प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किये जाने का प्रावधान है।

  • दो दिवसीय संस्थागत कृषक/महिला प्रशिक्षण (आइसोपाम):-इस कार्यक्रम में 30 कृषकों के समूह को 2 दिवसीय संस्थागत प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • राज्य योजनान्तर्गत अन्तर्राज्यीय कृषक भ्रमण:-40-50 कृषकों को अधिकतम 7 दिवसीय भ्रमण एवं अन्तर्राज्यीय कृषक भ्रमण के अन्तर्गत 40-50 कृषकों को अधिकतम 5 दिवसीय भ्रमण कराने का प्रावधन है।
  • कार्य योजना अन्तर्गत एक दिवसीय कृषक महिला प्रशिक्षण :-30 कृषक महिलाओं के समूह को एक दिवसीय प्रशिक्षण का प्रावधान है।
  • कृषि षिक्षा में अध्ययनरत छात्राओं को प्रोत्साहन राशि:-कृषि संकाय में अध्ययनरत छात्राओं को 11वीं तथा 12वीं कक्षा हेतु रूपये 3000/-, कृषि स्नातक व स्नातकोत्तर षिक्षा हेतु रूपये 5000/- और पीएचडी हेतु रूपये 10000/- प्रति वर्श प्रति छात्रा छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है।

मौसम आधारित फसल बीमा योजना:-

खरीफ एवं रबी में 15 फसलें यथा बाजरा, ज्वार, मक्का, धान, मूंग, मोठ, उड़द, चैला, तिल, मूंगफली, ग्वार, सोयाबीन, कपास, मिर्च एवं अरण्डी अधिसूचित की गई है। यह योजना सभी ऋणी कृषकों के लिए अनिवार्य तथा गैर ऋणी कृषकों के लिए स्वैच्छिक है। इस योजना में फसलों की लागत मूल्य के आधार पर बीमित राशि निर्धारित की गई है।

कृषि यंत्र वितरण कार्यक्रम:-

  • कार्य योजना के अन्तर्गत हस्त/बैलचलित कृषि यंत्रों जैसे ब्रोड बेड फाॅर्मर, फरो/रिजर, डिस्क प्लाउ इत्यादि पर मूल्य का 25 प्रतिशत अधिकतम रूपये 2,500/- का अनुदान देय है। ट्रैक्टर चलित कृषि यंत्रों जैसे सीड ड्रिल, चीजल/एम.बी.प्लाउ/डिस्क प्लाउ/रिजर प्लाउ/ब्लेड हैरो/ डिस्क हैरो पर मूल्य का 25 प्रतिशत अधिकतम रूपये 10,000/- का अनुदान देय है। विशिष्ट शक्ति चलित कृषि यंत्रों जैसे पोटेटो/ग्राउण्ड नट डिगर पर मूल्य का 25 प्रतिशत अधिकतम रूपये 15,000/- एवं जीरो टिल ड्रिल, रेज्ड बैड प्लान्टर, स्ट्रा रीपर पर मूल्य का 40 प्रतिशत अधिकतम रूपये 20,000/- एवं स्वचलित रीपर मशीन पर मूल्य का 25 प्रतिशत अधिकतम रूपये 40,000/- का अनुदान देय है।
  • आईसोपाम योजना के अन्तर्गत हस्त/बैल चलित कृषि यंत्रों जैसे सीड ड्रिल/सीड कम फर्टीलाईजर ड्रिल, बण्ड फार्मर, एम.बी.प्लाउ, रिजर प्लाउ इत्यादि पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 2,500/- का अनुदान देय है। आईसोपाम योजना के अन्तर्गत शक्ति चलित मल्टिक्रोप पावर थ्रेसर पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 15000/- एवं ट्रैक्टर चलित कृषि यंत्रों जैसे सीड कम फर्टीलाईजर ड्रिल, बण्ड फार्मर पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 15000/- का अनुदान देय है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत सीड ड्रिल/सीड कम फर्टीलाईजर-ड्रिल पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 15000/- का अनुदान एवं रोटोवटर पर मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 30000/-- का अनुदान देय है।